डोईवाला के तरली जौली में आबादी में घुसा हाथी, ग्रामीण की पक्की चाहरदीवारी तोड़ी; दहशत में लोग
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डोईवाला, देहरादून। जौलीग्रांट के तरली क्षेत्र में जंगली हाथी की आवाजाही से स्थानीय ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। सुबह करीब पांच बजे एक हाथी रिहायशी इलाके में पहुंच गया और एक ग्रामीण के मकान की पक्की चाहरदीवारी को क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। गनीमत रही कि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई और हाथी घर के अंदर नहीं घुसा।

सुबह के समय आबादी में पहुंचा हाथी

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, घटना वार्ड नंबर चार, तरली जौली क्षेत्र की बताई जा रही है। सुबह के समय हाथी को रिहायशी इलाके में देखकर ग्रामीण सतर्क हो गए। हाथी ने एक मकान की पक्की बाउंड्री वॉल तोड़ दी, जिससे संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

ग्रामीणों के अनुसार, समय रहते शोर मचाने और सतर्कता बरतने से हाथी घर के भीतर नहीं घुसा। घटना में किसी के घायल होने या जान जाने की सूचना नहीं है। हालांकि, रिहायशी क्षेत्र में हाथी के पहुंचने से लोगों में भय बना हुआ है।

वन विभाग से सुरक्षा और मुआवजे की मांग

स्थानीय निवासियों का कहना है कि जौलीग्रांट और आसपास के वन क्षेत्र से सटे इलाकों में जंगली हाथियों की आवाजाही लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। ग्रामीणों को घरों, चारदीवारी और खेतों को नुकसान पहुंचने का डर बना रहता है।

ग्रामीणों ने वन विभाग से प्रभावित मकान का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन करने और नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की है। इसके साथ ही सुबह और रात के समय वन विभाग की गश्त बढ़ाने तथा संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग भी उठाई है।

ग्रामीणों का कहना है कि संवेदनशील आबादी वाले क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग या अन्य उपयुक्त सुरक्षा उपायों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि वन्यजीवों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की घटनाओं को कम किया जा सके।

हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में सावधानी जरूरी

वन क्षेत्र से सटे गांवों में रहने वाले लोगों को सुबह तड़के और रात के समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। हाथी दिखाई देने पर उसके पास जाने, उसे घेरने, छेड़ने या भगाने के लिए पटाखे चलाने से बचना चाहिए। सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर वन विभाग या स्थानीय पुलिस को सूचना देनी चाहिए।

जंगली हाथियों के प्राकृतिक आवास और आवाजाही के रास्तों के आसपास बढ़ती मानवीय गतिविधियां मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या को गंभीर बना सकती हैं। ऐसे में निगरानी, समय पर सूचना और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

तरली जौली की इस घटना के बाद ग्रामीणों की नजर अब वन विभाग की कार्रवाई पर है। प्रभावित परिवार को राहत मिलने और क्षेत्र में गश्त बढ़ाए जाने से लोगों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने में मदद मिल सकती है।

रिपोर्ट: अजय सेमल्टी | हिमालयवाणी