Spread the love देहरादून। उत्तराखंड में इस समय मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सियासी गलियारों और प्रशासनिक हलकों में भारी खलबली मची हुई है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर चलाए जा रहे इस अभियान के तहत नाम, पते, मैपिंग और पारिवारिक विवरण में विसंगतियों को लेकर एक व्यापक उत्तराखंड वोटर लिस्ट नोटिस प्रक्रिया शुरू की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस जांच की आंच से राज्य के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी और कद्दावर राजनेता भी नहीं बच पाए हैं। खुद प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, राज्य के कई माननीय विधायकों, कुमाऊं कमिश्नर और विपक्ष के शीर्ष नेताओं के सरकारी रिकॉर्ड में नाम व पते की गंभीर त्रुटियां पाई गई हैं, जिसके बाद इन्हें औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। खुद मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के नाम में मिली त्रुटि निर्वाचन आयोग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के खुद के मतदाता रिकॉर्ड में तकनीकी गड़बड़ी पाई गई है। उनके पिता के नाम की स्पेलिंग (वर्तनी) में विसंगति सामने आने के बाद उन्हें यह उत्तराखंड वोटर लिस्ट नोटिस जारी हुआ। हालांकि, उन्होंने एक आदर्श मिसाल पेश करते हुए तुरंत अपने बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) से संपर्क किया और जरूरी सहायक दस्तावेज जमा करवाकर अपने इस नोटिस का निवारण करवा लिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आम जनता से अपील की है कि नोटिस मिलने पर किसी भी प्रकार के भ्रम या घबराहट में न आएं, क्योंकि यह वोटर लिस्ट को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाने की एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। कई बड़े विधायकों और शीर्ष अधिकारियों को भी थमाया गया नोटिस इस पुनरीक्षण अभियान के लपेटे में राज्य के कई रसूखदार जनप्रतिनिधि और नौकरशाह भी आए हैं। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को इसलिए नोटिस जारी किया गया क्योंकि साल 2003 की मतदाता सूची से उनका पूरा नाम गायब था। वहीं, देहरादून के रायपुर निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक उमेश शर्मा को उनके रिकॉर्ड में उपनाम (Surname) “काउ” जोड़ने की विसंगति को लेकर नोटिस दिया गया है। इसके अलावा, नैनीताल से भाजपा की महिला विधायक सरिता आर्य को उनके पते में बिना किसी पूर्व सूचना या रिकॉर्ड के हुए बदलाव को लेकर नोटिस जारी किया गया है। इस बड़े खुलासे के बाद राज्य में यह चर्चा जोरों पर है कि जब सूबे के इतने बड़े वीआईपी और खुद चुनाव अधिकारी के दस्तावेजों में इतनी गड़बड़ियां हैं, तो आम जनता की वोटर लिस्ट का क्या हाल होगा। राज्य में 20 लाख से अधिक लोगों को नोटिस, विपक्ष ने खड़े किए सवाल मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में कुल 24.30校 संदिग्ध या त्रुटिपूर्ण मतदाताओं को चिन्हित करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से अब तक 20.27 लाख मतदाताओं को नोटिस बांटे जा चुके हैं। इस भारी-भरकम संख्या में नोटिस जारी होने के बाद उत्तराखंड की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस अभियान पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे ‘पश्चिम बंगाल मॉडल’ की संज्ञा दी है और आरोप लगाया है कि इसके जरिए वास्तविक मतदाताओं को परेशान किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर, सत्ताधारी दल भाजपा का कहना है कि यह वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण का एक रूटीन और तकनीकी कार्य है, जिससे फर्जी मतदान पर रोक लगेगी और राज्य में मतदान का प्रतिशत बेहतर होगा। हिमालयावाणी की अपील: घबराएं नहीं, तुरंत बीएलओ से मिलें हिमालयावाणी की अपील: ‘हिमालयावाणी’ अपने सभी पाठकों और उत्तराखंड के जागरूक नागरिकों से अपील करता है कि निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) के तहत यदि आपके घर भी कोई नोटिस आया है, तो घबराएं नहीं। आप तुरंत अपने क्षेत्र के बीएलओ (BLO) अधिकारी से मिलें और आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र या सही पते के दस्तावेज जमा करके अपनी जानकारी को ऑनलाइन दुरुस्त करवा लें, ताकि भविष्य में होने वाले चुनावों में आपका मताधिकार सुरक्षित रहे। Post Views: 6 Post navigation उत्तराखंड में बारिश का कहर: 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, 99 से अधिक सड़कें बंद, देहरादून में स्कूलों की छुट्टी उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर: 120 से ज्यादा सड़कें बंद, यमुनोत्री मार्ग से 100 तीर्थयात्रियों का रेस्क्यू