Spread the loveडोईवाला (देहरादून) नगर पालिका डोईवाला क्षेत्र के कुड़कावाला बस्ती में शनिवार देर रात हुई एक खौफनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। आवारा कुत्तों के एक बड़े और आक्रामक झुंड ने एक गरीब पशुपालक के बाड़े में घुसकर ऐसी तबाही मचाई कि देखने वालों की रूह कांप गई। कुत्तों ने बाड़े में बंधी 37 भेड़-बकरियों और छोटे-छोटे मेमनों को नोंच-नोंच कर मार डाला, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गईं।कैसे हुई पूरी वारदात?पीड़ित पशुपालक का नाम जॉनी पाल है, जो कुड़कावाला बस्ती में अपने परिवार के साथ रहता है और पिछले कई सालों से भेड़-बकरी पालन कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा है। रोज की तरह जॉनी ने शनिवार शाम को अपनी सभी भेड़-बकरियों को बाड़े में सुरक्षित बंद कर दिया था।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देर रात करीब 1 से 2 बजे के बीच 15 से 20 आवारा कुत्तों का एक झुंड बाड़े की बाउंड्री फांदकर अंदर घुस गया। बाड़े में मौजूद बेजुबान मेमने कुछ समझ पाते, इससे पहले ही कुत्तों ने उन पर सामूहिक हमला कर दिया। बाड़े में चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर जब तक जॉनी पाल और पड़ोसी लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे, तब तक कुत्तों का झुंड अपना काम कर चुका था। लोगों के शोर मचाने पर कुत्ते जंगल की ओर भाग गए, लेकिन पीछे छोड़ गए खून से लथपथ 37 मृत मेमने और घायल बेजुबान।रविवार सुबह जब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आया तो हर कोई सिहर उठा। पूरे बाड़े में मरे हुए मेमने बिखरे पड़े थे।लाखों का नुकसान, परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकटजॉनी पाल के लिए यह सिर्फ 37 जानवरों की मौत नहीं, बल्कि उसकी पूरी जीवन भर की कमाई का नुकसान है। ग्रामीणों के अनुसार, बाजार में एक भेड़-बकरी की कीमत 8 से 10 हजार रुपये तक है। इस हिसाब से जॉनी को एक ही रात में 3 से 4 लाख रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है। उसका परिवार पूरी तरह से इसी पशुपालन पर निर्भर था। अब उसके सामने परिवार को कैसे पालें, यह सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है।पहले भी हो चुके हैं ऐसे हमले, फिर भी नहीं चेता प्रशासनयह पहली घटना नहीं है। पिछले एक महीने में ही डोईवाला के विभिन्न वार्डों में आवारा कुत्तों द्वारा बकरी और मुर्गियों पर हमले की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नगर पालिका ने ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया फाउंडेशन के साथ मिलकर नसबंदी और रेबीज टीकाकरण अभियान तो शुरू किया था, जिसमें एक दिन में 10 कुत्ते पकड़े गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गली-गली में 20-20 कुत्तों के झुंड घूम रहे हैं जो अब आदमखोर होते जा रहे हैं।सभासद और ग्रामीणों की दो टूक मांगघटना के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय वार्ड सभासद रियासत अली मोंटी ने इसे नगर पालिका की लापरवाही करार दिया। उन्होंने कहा, “हम लगातार बोर्ड बैठक में आवारा कुत्तों का मुद्दा उठा रहे हैं। अगर समय रहते कुड़कावाला बस्ती में अभियान नहीं चलाया गया तो ये कुत्ते कल किसी बच्चे पर भी हमला कर सकते हैं।”स्थानीय लोगों ने प्रशासन से दो मांगें की हैं:तत्काल कुड़कावाला बस्ती और आसपास के क्षेत्रों से सभी आवारा और आक्रामक कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष ड्राइव चलाई जाए।पीड़ित पशुपालक जॉनी पाल के नुकसान का आकलन कर पशुपालन विभाग और आपदा राहत कोष से उसे तुरंत उचित मुआवजा दिया जाए।फिलहाल पशुपालन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर मृत पशुओं का पंचनामा किया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गरीब परिवार की मदद के लिए कितनी जल्दी कदम उठाता है। Post Views: 4 Post navigationखाद का संकट: डोईवाला में किसानों का हल्लाबोल, कृषि कार्यालय और सोसायटियों के बाहर प्रदर्शन – धान की फसल पर खतरा