उत्तराखंड कैडर के DIG प्रहलाद मीणा को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी, WCCB में बने उप निदेशक
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देहरादून। उत्तराखंड कैडर के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारियों में गिने जाने वाले प्रहलाद नारायण मीणा को केंद्र सरकार ने देश की सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव सुरक्षा एजेंसी में बड़ी जिम्मेदारी दी है। 2012 बैच के इस अधिकारी को वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (Wildlife Crime Control Bureau – WCCB) में उप निदेशक (इंटेलिजेंस एंड कोऑर्डिनेशन) नियुक्त किया गया है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिया है। मंत्रालय के अनुसार प्रहलाद नारायण मीणा, जो उत्तराखंड कैडर के आईपीएस हैं, को यह नियुक्ति नॉन-सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत 5 साल के लिए दी गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगा।

केंद्र ने इस नियुक्ति के साथ ही उत्तराखंड शासन को पत्र भेजकर मीणा को उनकी वर्तमान जिम्मेदारियों से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त (Relieve) करने का अनुरोध किया है, ताकि वे नई दिल्ली स्थित WCCB मुख्यालय में अपना नया दायित्व संभाल सकें।

वर्तमान में DIG विजिलेंस हैं मीणा
वर्तमान में प्रहलाद नारायण मीणा उत्तराखंड में पुलिस उपमहानिरीक्षक, विजिलेंस मुख्यालय (DIG, Vigilance HQRS) के पद पर तैनात हैं। इसी साल उत्तराखंड सरकार द्वारा किए गए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में उन्हें इस पद पर पदोन्नति दी गई थी।

विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) ने उन्हें सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस से DIG के पद पर प्रमोशन के लिए क्लियर किया था। उत्तराखंड सरकार ने उनकी इस पदोन्नति के साथ ही उन्हें विजिलेंस मुख्यालय में DIG के तौर पर तैनाती दी थी। इससे पहले वे नैनीताल जिले के कप्तान के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे और वहीं से उन्हें हटाकर पहले SP Vigilance Headquarters बनाया गया था।

विजिलेंस में अपने छोटे से कार्यकाल में भी उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत चलाए जा रहे ट्रैप अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। पिछले साल विजिलेंस प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में SSP Vigilance Headquarters के तौर पर वे मौजूद रहे थे, जहां 21 ट्रैप ऑपरेशन में 26 भ्रष्ट अधिकारियों की गिरफ्तारी का खुलासा किया गया था।

अल्मोड़ा से नैनीताल तक – ऐसा रहा सफर
2012 बैच के आईपीएस प्रहलाद मीणा का उत्तराखंड में फील्ड का लंबा अनुभव है। राज्य के पहाड़ी और संवेदनशील जिलों में कानून-व्यवस्था संभालने का उनका ट्रैक रिकॉर्ड काफी मजबूत माना जाता है।

2019-2020 में उन्होंने अल्मोड़ा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के तौर पर कार्य किया। इसके बाद 2021 में उन्हें हल्द्वानी में SP CID और सतर्कता सेक्टर की जिम्मेदारी दी गई।

2023 से 2025 के बीच उनका सबसे चर्चित कार्यकाल नैनीताल जिले के SSP के तौर पर रहा। नैनीताल जैसे पर्यटन और संवेदनशील हल्द्वानी क्षेत्र वाले जिले में कानून-व्यवस्था, अतिक्रमण और सांप्रदायिक संवेदनशीलता के मामलों को उन्होंने बखूबी संभाला। इसी दौरान नैनीताल में कई हाई-प्रोफाइल मामलों में उनकी कार्यशैली की चर्चा रही। बाद में शासन ने उन्हें नैनीताल SSP पद से हटाकर विजिलेंस में तैनात किया।

क्या है WCCB और क्यों अहम है ये पद?
वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) भारत सरकार की एक वैधानिक संस्था है जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत काम करती है। इसका मुख्य काम देश भर में वन्यजीवों के अवैध शिकार, तस्करी और व्यापार पर रोक लगाना है।

इसमें उप निदेशक (इंटेलिजेंस एंड कोऑर्डिनेशन) का पद सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशनल पदों में से एक माना जाता है। इस पद पर तैनात अधिकारी का काम होता है –

  1. इंटेलिजेंस गैदरिंग: देश भर में फैले वन्यजीव तस्करी सिंडिकेट पर खुफिया जानकारी जुटाना
  2. इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन: राज्य वन विभागों, पुलिस, कस्टम, DRI और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय बनाना
  3. कैपेसिटी बिल्डिंग: फील्ड अधिकारियों को वैज्ञानिक और कानूनी प्रशिक्षण देना
  4. डेटा एनालिसिस: तस्करी के रूट और पैटर्न का विश्लेषण कर भविष्य में अपराध रोकना

सरकार का मानना है कि एक अनुभवी आईपीएस अधिकारी के आने से ब्यूरो की जांच और अभियोजन क्षमता और मजबूत होगी। वन्यजीव अपराध अब केवल शिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ और हथियार तस्करी नेटवर्क से भी जुड़े होते हैं।

उत्तराखंड के लिए क्यों है गौरव की बात?
उत्तराखंड देश के सबसे समृद्ध वन संपदा वाले राज्यों में से एक है। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे विश्व प्रसिद्ध संरक्षित क्षेत्र यहीं हैं। यहां के एक अधिकारी को जो खुद पहाड़ी क्षेत्रों में वन्यजीव-मानव संघर्ष और तस्करी के मामलों को देख चुका है, उसका WCCB में जाना राज्य के लिए भी गौरव का विषय है।

वन्यजीव अपराधों में उत्तराखंड हमेशा से संवेदनशील रहा है, खासकर बाघ के अंगों, तेंदुए की खाल और दुर्लभ जड़ी-बूटियों की तस्करी के मामलों में। ऐसे में उत्तराखंड कैडर के अधिकारी का अनुभव केंद्रीय एजेंसी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

आगे क्या?
नियमानुसार अब उत्तराखंड के गृह विभाग द्वारा जल्द ही औपचारिक शासनादेश जारी कर प्रहलाद नारायण मीणा को विजिलेंस मुख्यालय से कार्यमुक्त किया जाएगा। कार्यमुक्त होने के बाद वे नई दिल्ली में WCCB मुख्यालय में अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे।

पुलिस महकमे में चर्चा है कि उनके जाने के बाद विजिलेंस मुख्यालय में DIG के पद पर किसी अन्य अधिकारी की तैनाती की जाएगी। फिलहाल शासन स्तर पर इस फाइल पर मंथन जारी है।