उत्तराखंड में आउटसोर्सिंग बनाम स्थायी भर्ती का मुद्दा फिर चर्चा में, युवाओं की नजर सरकार के अगले कदम पर
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उत्तराखंड में सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग, संविदा और सीधी भर्ती को लेकर बहस लगातार बनी हुई है। बेरोजगार युवा संगठनों की प्रमुख मांग है कि नियमित प्रकृति के रिक्त पदों को स्थायी भर्ती के माध्यम से भरा जाए, जबकि दूसरी ओर सरकार के विभिन्न विभागों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से भी मानव संसाधन की व्यवस्था जारी है।

राज्य में आउटसोर्सिंग व्यवस्था को रोजगार प्रयाग पोर्टल से जोड़ा गया है। मार्च 2025 के शासनादेश में इस व्यवस्था में संशोधन करते हुए शैक्षिक योग्यता, अनुभव, विशेष अर्हता, जनपद और प्रशासनिक इकाई के आधार पर मेरिट सहित विभिन्न फिल्टर शामिल किए गए हैं।

हालांकि, आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े मामलों में सरकार की ओर से कुछ महत्वपूर्ण कदम भी सामने आए हैं। उत्तराखंड हाईकोर्ट में जुलाई 2026 में सरकार की ओर से बताया गया कि कैबिनेट के निर्णय के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था 1 मार्च 2026 से लागू होगी। साथ ही पात्र आउटसोर्स कर्मचारियों को संविदा कर्मचारी का दर्जा देकर 2013 के नियमितीकरण नियमों के दायरे में लाने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया।

दूसरी ओर, सरकारी संस्थानों में आउटसोर्स व्यवस्था अभी समाप्त नहीं हुई है। उदाहरण के तौर पर उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में 2026 के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को आगे बढ़ाने और उनके वेतन से संबंधित कई आदेश जारी हुए हैं। अगस्त 2026 में आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और देय महंगाई भत्ते की स्वीकृति से संबंधित आदेश भी जारी किया गया।

रोजगार के मोर्चे पर सरकार और भर्ती आयोग की ओर से सीधी भर्तियां भी जारी हैं। सितंबर 2026 में UKSSSC ने विभिन्न विभागों में 101 पदों पर सीधी भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। वहीं सेवायोजन विभाग ने 2026 के संभावित रिक्त पदों की जानकारी भी जारी की है।

ऐसे में उत्तराखंड के युवाओं के सामने मुख्य सवाल यही है कि नियमित और स्थायी प्रकृति के पदों पर सीधी भर्ती का दायरा कितना बढ़ेगा और लंबे समय से आउटसोर्स या संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सरकार की नीति किस रूप में आगे बढ़ेगी।

रिपोर्ट: अजय सेमल्टी / HIMALAYAVANI

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