Spread the loveचंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को चंपावत जिले के बनबसा में राज्य कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। देहरादून से बाहर सीमांत क्षेत्र में हुई इस बैठक को सरकार की सीमा क्षेत्रों तक शासन और विकास की पहुंच बढ़ाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में करीब 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कैबिनेट बैठकों को केवल देहरादून तक सीमित नहीं रखना चाहती। अलग-अलग जिलों और सीमांत क्षेत्रों में बैठकें आयोजित करने का उद्देश्य स्थानीय समस्याओं और विकास की जरूरतों को करीब से समझना तथा उनके समाधान के लिए नीतिगत फैसले लेना है। बैठक में सीमांत क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, बुनियादी सुविधाओं, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने से जुड़े विषयों पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा सिंचाई से संबंधित विधेयक, स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों के स्टाइपेंड और वेतन में संशोधन तथा संपत्ति लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए PAN सत्यापन जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ेगी कनेक्टिविटी कैबिनेट बैठक के दौरान भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की भी चर्चा रही। लोक निर्माण एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बनबसा क्षेत्र में निर्माणाधीन ड्राई पोर्ट और फोरलेन सड़क परियोजना का निरीक्षण किया। बनबसा से नेपाल सीमा तक करीब 3.06 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। इस सड़क के तैयार होने से सीमा क्षेत्र में आवागमन और माल परिवहन को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। परियोजना की शुरुआती लागत करीब 177 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों और निर्माण में आई चुनौतियों के चलते लागत बढ़कर लगभग 250 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ड्राई पोर्ट और बेहतर सड़क संपर्क विकसित होने से भारत-नेपाल सीमा पर व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। इससे माल परिवहन की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होने के साथ ही सीमांत क्षेत्र में रोजगार और स्थानीय कारोबार के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं। बनबसा में हुई यह कैबिनेट बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सरकार ने सीमांत क्षेत्र को सीधे अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं के केंद्र में रखने का संदेश दिया है। रिपोर्ट: अजय सेमल्टी / HIMALAYAVANI Post Views: 4 Post navigation उत्तराखंड में आउटसोर्सिंग बनाम स्थायी भर्ती का मुद्दा फिर चर्चा में, युवाओं की नजर सरकार के अगले कदम पर उत्तराखंड में SIR के बाद नई मतदाता सूची जारी, 12.70 लाख नाम कम