Spread the loveदेहरादून। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर बेहद सक्रिय हो गया है। मंगलवार को देहरादून समेत राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित रहा। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कें बंद होने की घटनाओं ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है।भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार को देहरादून, चंपावत, बागेश्वर, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर अत्यधिक तीव्र बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली की आशंका जताई गई है। वहीं गढ़वाल के पर्वतीय जिलों समेत राज्य के अन्य हिस्सों में येलो अलर्ट और खराब मौसम को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।97 सड़कें बारिश और भूस्खलन से प्रभावितलगातार बारिश का सबसे बड़ा असर राज्य की सड़क कनेक्टिविटी पर पड़ा है। बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में करीब 97 सड़कें अवरुद्ध बताई गई हैं। कई स्थानों पर पहाड़ी से मलबा और बोल्डर सड़क पर आने के कारण यातायात बाधित हुआ है।सड़क मार्गों को खोलने के लिए संबंधित विभागों की टीमें मशीनरी के साथ काम कर रही हैं। हालांकि लगातार बारिश के कारण कई संवेदनशील स्थानों पर मलबा दोबारा आने की आशंका बनी हुई है।देहरादून में बारिश से जनजीवन प्रभावितराजधानी देहरादून में सोमवार रात से ही बारिश का सिलसिला जारी रहा। लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी और सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई।बारिश को देखते हुए प्रशासन ने मंगलवार को देहरादून जिले में कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने का निर्णय लिया। यह फैसला विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एहतियात के तौर पर लिया गया।पहाड़ों में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरालगातार भारी बारिश के बीच पहाड़ी जिलों में लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ गया है। तेज बारिश के दौरान पहाड़ी नालों और गदेरों में अचानक पानी का स्तर बढ़ सकता है। ऐसे में नदी, नाले और जलधाराओं के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।प्रशासन ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और चारधाम यात्रियों से भी मौसम की स्थिति देखकर यात्रा की योजना बनाने की अपील की है। भारी बारिश के दौरान नदी-नालों और जलभराव वाले रास्तों को पार करने से बचने की सलाह दी गई है।50 से 60 किमी प्रति घंटे तक तेज हवाओं की आशंकाबारिश के साथ राज्य के कुछ हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। आकाशीय बिजली के दौरान लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के दौरान अचानक सड़क पर मलबा आने या नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने की स्थिति बन सकती है। इसलिए मौसम खराब होने पर गैर-जरूरी यात्रा टालना ज्यादा सुरक्षित है।21 अगस्त तक जारी रह सकता है बारिश का दौरमौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार उत्तराखंड में बारिश का यह दौर 21 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है। इसके चलते आने वाले दिनों में भी जलभराव, भूस्खलन और सड़क संपर्क प्रभावित होने का खतरा बना रह सकता है।प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।यात्रियों के लिए जरूरी सावधानीबारिश के इस दौर में पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।मौसम विभाग की ताजा चेतावनी देखकर ही यात्रा करें।भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में वाहन रोककर खड़े न हों।नदी, नाले और गदेरों के किनारे जाने से बचें।तेज बारिश में जलभराव वाली सड़क को पार करने का जोखिम न लें।आकाशीय बिजली के दौरान खुले स्थान और पेड़ों के नीचे खड़े न हों।सड़क बंद होने की स्थिति में प्रशासन द्वारा जारी वैकल्पिक मार्ग की जानकारी लें।चारधाम और पहाड़ी यात्रा पर निकलने से पहले संबंधित प्रशासन से मार्ग की स्थिति की जानकारी जरूर लें।प्रशासन की चुनौती बढ़ीउत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में भारी बारिश के दौरान सड़क और संचार व्यवस्था को सुचारु रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। एक ओर जहां बारिश और भूस्खलन से सड़कें बंद हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर बंद मार्गों को खोलने के दौरान दोबारा मलबा आने का खतरा भी बना रहता है।ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सड़क संपर्क बहाल रखने, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करने और स्थानीय लोगों तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की होगी।करारा सवालहर साल मानसून में उत्तराखंड की सड़कें भूस्खलन और मलबे के कारण बंद होती हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या संवेदनशील पहाड़ी मार्गों की स्थायी सुरक्षा के लिए सिर्फ मलबा हटाने के बजाय दीर्घकालिक इंतजामों पर पर्याप्त काम हो रहा है?नोट: मौसम की स्थिति तेजी से बदल सकती है। यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ताजा चेतावनी अवश्य देखें। Post Views: 7 Post navigationदेहरादून में भारी बारिश का खतरा: 18 अगस्त को स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने के आदेश, प्रशासन अलर्ट स्वारना नदी में फंसे UPES के 6 छात्रों को SDRF ने किया सुरक्षित रेस्क्यू, 6 KM पैदल चलकर पहुंची टीम