Spread the loveदेहरादून। राजधानी देहरादून में जमीन की खरीद-फरोख्त के नाम पर 25 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मोथरोवाला क्षेत्र में टिहरी विस्थापितों की जमीन दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से लाखों रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित का आरोप है कि जमीन का सौदा कराने के लिए रजिस्टर्ड पावर ऑफ अटॉर्नी और रजिस्टर्ड एग्रीमेंट तक कराया गया, लेकिन बाद में पता चला कि जिस जमीन को दिलाने का भरोसा दिया गया था, उस पर आरोपियों का वैध मालिकाना हक नहीं था। पीड़ित वीरेन्द्र सिंह रावत के अनुसार, टिहरी गढ़वाल निवासी महावीर पडियार और मनोहर लाल सहित कुछ अन्य लोगों ने मिलकर उन्हें मोथरोवाला क्षेत्र में टिहरी विस्थापितों की जमीन दिलाने का प्रस्ताव दिया था। आरोपियों ने जमीन का सौदा वैध बताते हुए उन्हें भरोसे में लिया। बातचीत के बाद जमीन के लेनदेन को लेकर रजिस्टर्ड पावर ऑफ अटॉर्नी और रजिस्टर्ड एग्रीमेंट की प्रक्रिया भी पूरी कराई गई। इसी आधार पर पीड़ित से करीब 25 लाख रुपये हासिल किए गए। पीड़ित का कहना है कि उन्हें विश्वास था कि जमीन का सौदा कानूनी रूप से सही है और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें जमीन का मालिकाना हक मिल जाएगा। लेकिन रकम देने के बाद जब उन्होंने जमीन से संबंधित अभिलेखों और स्वामित्व की जानकारी जुटाई तो कथित तौर पर सामने आया कि जिस जमीन का सौदा किया गया था, वह आरोपियों के नाम पर दर्ज नहीं है। इसके बाद पीड़ित ने पूरे मामले को कथित धोखाधड़ी बताते हुए आरोपियों से अपनी रकम वापस मांगी। उनका आरोप है कि जमीन पर वैध अधिकार नहीं होने के बावजूद उन्हें सौदे का भरोसा दिलाकर रकम ली गई, जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ। सरकारी कर्मचारी होने का भी आरोप इस मामले में पीड़ित ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि धोखाधड़ी में कथित रूप से शामिल मुख्य व्यक्ति टिहरी गढ़वाल में लोक निर्माण विभाग (PWD) में सरकारी कर्मचारी के रूप में कार्यरत है। आरोप है कि सरकारी सेवा में रहते हुए उसने अपने साथियों के साथ मिलकर जमीन के सौदे के नाम पर यह लेनदेन किया। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। एसएसपी से निष्पक्ष जांच की मांग अपने साथ हुई कथित धोखाधड़ी से परेशान वीरेन्द्र सिंह रावत ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून को शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पीड़ित ने शिकायत में महावीर पडियार, मनोहर लाल और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच करने, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने तथा अपनी 25 लाख रुपये की रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच के परिणाम सामने आना बाकी है। मामले में रजिस्टर्ड पावर ऑफ अटॉर्नी, एग्रीमेंट, जमीन के राजस्व अभिलेख और भुगतान से जुड़े दस्तावेज जांच के महत्वपूर्ण आधार हो सकते हैं। रिपोर्ट: अजय सेमल्टी | हिमालयवाणी Post Views: 24 Post navigation देहरादून में सगे भाई ने ही लगाया ₹27 लाख का चूना, जमीन दिलाने के नाम पर की धोखाधड़ी देहरादून में आधी रात पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़, जवाबी फायरिंग में दो आरोपी घायल