Spread the loveनई दिल्ली। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों में जल्द न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (FTSC) की योजना को अगले पांच वर्षों यानी 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही देशभर में इन विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों और बच्चों से जुड़े पॉक्सो (POCSO) मामलों की सुनवाई में तेजी लाना है। सरकार के इस निर्णय से देशभर में लंबित संवेदनशील आपराधिक मामलों के निस्तारण को गति मिलने की उम्मीद है। विशेष अदालतों के माध्यम से ऐसे मामलों की सुनवाई सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के मुकाबले प्राथमिकता के आधार पर करने की व्यवस्था की जाती है, ताकि पीड़ितों और उनके परिवारों को लंबे समय तक न्याय का इंतजार न करना पड़े। पॉक्सो मामलों की सुनवाई पर विशेष जोर इस योजना के तहत पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इन अदालतों में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी। विशेष रूप से ऐसे जिलों में अदालतों की उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा, जहां इस तरह के मामलों का लंबित बोझ अधिक है। पॉक्सो एक्ट के तहत बच्चों के यौन शोषण और अन्य संबंधित अपराधों को गंभीरता से लिया जाता है। ऐसे मामलों में समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना पीड़ित बच्चों के हितों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। लंबित मामलों का बोझ कम करने की तैयारी फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाने के पीछे एक प्रमुख उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करना है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में देरी होने से पीड़ितों को मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। नई व्यवस्था के तहत विशेष अदालतों की क्षमता बढ़ने से मामलों की सुनवाई और निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही न्यायिक संसाधनों को मजबूत करने और संबंधित मामलों को प्राथमिकता देने में भी मदद मिलेगी। 2031 तक जारी रहेगी योजना केंद्र सरकार ने इस योजना को पांच साल का विस्तार देकर वर्ष 2031 तक जारी रखने का निर्णय लिया है। देशभर में 850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों का लक्ष्य पूरा होने पर महिलाओं और बच्चों से जुड़े गंभीर अपराधों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध होगी। हालांकि, केवल अदालतों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। इनके प्रभावी संचालन के लिए न्यायाधीशों, कर्मचारियों, अभियोजन व्यवस्था और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी। सरकार के इस फैसले को महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्यों में इन अदालतों की स्थापना और संचालन कितनी तेजी से किया जाता है। Post Views: 5 Post navigation अग्निवीरों को बड़ी राहत, 75% जवानों को मिलेगा 2 साल का सेवा विस्तार UGC Rules 2026: विरोध के बाद केंद्र का बड़ा कदम, समीक्षा के लिए बनेगी Special Committee