Spread the loveदेहरादून। ग्रामीण उद्यमिता को नई उड़ान देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून में मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना चौपाल-2026 कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उद्यमिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली मातृशक्ति को सम्मानित किया तथा उत्तराखंड ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत तैयार की गई IEC (सूचना-शिक्षा-संचार) सामग्री का विमोचन किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि ग्रामीण उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए देहरादून में राज्य स्तरीय विपणन केंद्र (State Level Marketing Centre) खोला जाएगा।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री द्वारा किया गया, जिसके साथ ही जनपद स्तर पर भी चौपाल कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ और IEC वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह चौपाल 21 अगस्त से 6 सितम्बर तक प्रदेश के सभी विकास खंडों में नोडल अधिकारियों की देखरेख में आयोजित की जाएगी।क्या है मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना?मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रहे छोटे-छोटे उद्यमों को सशक्त बनाना, युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें रोजगार के नए अवसरों से जोड़ना है।यह योजना केवल लोन या सब्सिडी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक पूरा इको-सिस्टम तैयार करती है। इसके तहत ग्रामीण उद्यमियों को:उत्पाद की ब्रांडिंग और पैकेजिंग में सहयोगबाजार से जोड़ने के लिए विपणन (मार्केटिंग) सपोर्टप्रशिक्षण और कौशल उन्नयनवित्तीय साक्षरता और बैंक लिंकेजप्रदान किया जाता है। सरकार के अनुसार, योजना के माध्यम से अब तक 13 हजार से अधिक उद्यमियों को सहयोग प्रदान किया जा चुका है, जबकि 8 हजार से अधिक मातृशक्ति को सीधे उद्यमिता से जोड़ा गया है।मातृशक्ति बनी अर्थव्यवस्था की रीढ़ – 3 लाख लखपति दीदीकार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, “आज हमारी मातृशक्ति अपने हुनर और परिश्रम से न केवल स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दे रही है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।”मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना और मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश में लगभग 5 लाख महिलाएं, 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कार्य कर रही हैं।सबसे गर्व की बात यह है कि प्रदेश की 3 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह सिद्ध कर रही हैं कि अवसर और सहयोग मिले तो हमारी बहनें गांव की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल सकती हैं। मुख्यमंत्री ने मंच से उन महिलाओं को सम्मानित भी किया जिन्होंने अचार, जैम, हर्बल उत्पाद, हैंडीक्राफ्ट, बेकरी और जैविक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है।IEC सामग्री का विमोचन – गांव-गांव पहुंचेगी जानकारीकार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत तैयार IEC किट का विमोचन किया। इस किट में योजनाओं की जानकारी देने वाले पम्पलेट, पोस्टर, लघु फिल्में और उत्पाद कैटलॉग शामिल हैं।इन IEC वैनों को सभी जिलों में भेजा जाएगा, जो गांव-गांव जाकर महिलाओं और युवाओं को योजनाओं के बारे में जागरूक करेंगी। इसका मकसद है कि अंतिम छोर पर बैठा व्यक्ति भी जान सके कि सरकार उसके लिए क्या कर रही है।देहरादून में खुलेगा राज्य स्तरीय विपणन केंद्रकार्यक्रम की सबसे बड़ी घोषणा रही राज्य स्तरीय विपणन केंद्र की। अक्सर ग्रामीण उद्यमियों की शिकायत रहती है कि उत्पाद तो अच्छा बना लेते हैं, लेकिन बेचें कहां?इस समस्या के समाधान के लिए देहरादून में एक स्थायी और आधुनिक विपणन केंद्र खोला जाएगा। यहां प्रदेश के सभी 13 जिलों के स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों के उत्पादों को एक ही छत के नीचे प्रदर्शित और विक्रय किया जाएगा। साथ ही ऑनलाइन मार्केटिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट में भी सरकार मदद करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केंद्र उत्तराखंड के हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में मदद करेगा।मंच पर मौजूद रहे दिग्गजइस अवसर पर माननीय राज्यसभा सांसद श्री नरेश बंसल जी, माननीय कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी जी, विधायक श्री भरत सिंह चौधरी जी, श्री खजान दास जी, माननीय विधायक श्री उमेश शर्मा काऊ जी, श्रीमती सविता हरबंस कपूर जी सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी, जिला पंचायत अध्यक्ष और बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित रहीं।हिमालयवाणी विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह चौपाल?उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में जहां सरकारी नौकरी की सीमाएं हैं, वहां स्वरोजगार ही पलायन को रोकने का सबसे बड़ा हथियार है। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना चौपाल-2026 सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन-अभियान है।पहले चरण में यह चौपाल युवाओं और महिलाओं को जागरूक करेगी, दूसरे चरण में उनके उत्पादों को बाजार देगी। यदि देहरादून का विपणन केंद्र सफल होता है, तो आने वाले समय में हर जिले में ऐसे केंद्र खुल सकते हैं। 3 लाख लखपति दीदी का आंकड़ा यह बताता है कि जब महिलाओं को सही प्लेटफॉर्म मिलता है, तो वे पूरे गांव की अर्थव्यवस्था बदल देती हैं।हिमालयवाणी की टीम ग्राउंड जीरो से इस चौपाल की कवरेज लगातार करती रहेगी। Post Views: 3 Post navigationउत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट: ऊधमसिंह नगर में स्कूल बंद, 5 जिलों में Yellow Alert; भूस्खलन का खतरा बढ़ा दुःखद : हेली सेवा से पहले ही टूटी सांसें, मोरी के सीमांत गांव में मां और नवजात की मौत से पसरा मातम