Spread the love देहरादून। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद जारी नई मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस और निर्वाचन आयोग के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस SIR कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व विधायक मनोज रावत ने आरोप लगाया है कि पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए हैं। कांग्रेस का दावा है कि यह आंकड़ा करीब 13.89 लाख है। पार्टी ने इसे लेकर अदालत जाने की बात भी कही है। हालांकि निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़े कांग्रेस के दावे से अलग हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार SIR शुरू होने के समय 8 जून 2026 को उत्तराखंड में 79,60,762 मतदाता दर्ज थे। 14 जुलाई को जारी ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 71,33,785 रह गई। दावे और आपत्तियों के बाद 3 अक्टूबर को जारी अंतिम मतदाता सूची में 71,58,949 मतदाता दर्ज किए गए। यानी SIR शुरू होने के समय की आधिकारिक संख्या की तुलना में अंतिम सूची में करीब 8.02 लाख मतदाता कम हैं। कांग्रेस का क्या आरोप है? मनोज रावत का कहना है कि पुनरीक्षण से पहले राज्य में मतदाताओं की संख्या करीब 85.19 लाख थी। उनके अनुसार अंतिम सूची में यह संख्या घटकर करीब 71.58 लाख रह गई है। कांग्रेस इसे मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया है कि बड़ी संख्या में नाम हटाने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही और मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिला या नहीं। 95 हजार से ज्यादा Form-7 आवेदन हुए अमान्य SIR के दौरान Form-7 को लेकर भी विवाद सामने आया। Form-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज करने के लिए किया जाता है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में 1.73 लाख से अधिक Form-7 आवेदन दर्ज हुए थे, जिनमें 95 हजार से अधिक आवेदन अयोग्य श्रेणी में रखे गए। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार इन मामलों में संबंधित मतदाता जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके या सत्यापन/सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। ऐसे मतदाताओं को Form-6 के माध्यम से दोबारा मतदाता सूची में शामिल होने का अवसर दिया गया है। BLO घर-घर जाकर करेंगे पहचान अंतिम सूची जारी होने के बाद भी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। निर्वाचन आयोग ने उन लोगों की दोबारा पहचान करने के निर्देश दिए हैं जो SIR से पहले मतदाता सूची में थे लेकिन नई सूची में दिखाई नहीं दे रहे हैं। BLO यानी बूथ लेवल अधिकारी पुराने और नए रिकॉर्ड का मिलान करेंगे तथा संबंधित मतदाताओं के घर जाकर उनकी स्थिति की जानकारी लेंगे। पात्र पाए जाने पर Form-6 के जरिए उनका नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने में मदद की जाएगी। निर्वाचन आयोग ने कमजोर और वंचित वर्गों, मजदूरों, बेघर लोगों तथा अन्य छूटे हुए पात्र मतदाताओं के लिए विशेष कैंप और सहायता केंद्र लगाने की भी व्यवस्था की है। अंतिम सूची में जुड़े 1.29 लाख नए नाम आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक ड्राफ्ट सूची के बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिय Post Views: 3 Post navigation राज्यसभा चुनाव: BJP प्रत्याशी दिनेश आर्य ने दाखिल किया नामांकन, सीएम धामी समेत कई नेता रहे मौजूद