Spread the loveदेहरादून। उत्तराखंड में सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक संपत्तियों के आवंटन को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने धामी सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी ‘भूमि बचाओ, धामी हटाओ’ अभियान शुरू कर दिया है। इसी अभियान के तहत 4 नवंबर 2026 को मसूरी स्थित ऐतिहासिक जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में सरकारी भूमि के निजी कंपनियों को आवंटन का मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ऐतिहासिक धरोहरों और बेशकीमती सरकारी जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। George Everest Estate पर विवाद कांग्रेस के मुताबिक, मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की करीब 144 हेक्टेयर भूमि निजी कंपनी को महज एक करोड़ रुपये सालाना की लीज पर दी गई है। पार्टी ने इस आवंटन की प्रक्रिया और शर्तों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता करण माहरा का दावा है कि इस पर्यटन स्थल के विकास पर पहले एशियाई विकास बैंक (ADB) से 23.50 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर सरकारी धन खर्च किया गया था। ऐसे में विकसित सरकारी संपत्ति को निजी कंपनी को सौंपने से राज्य को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि भूमि आवंटन के मामलों में उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) को जरूरत से ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। विपक्ष का दावा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट की मंजूरी के बिना बोर्ड को जमीनों की पहचान और आवंटन से संबंधित व्यापक शक्तियां दी हैं। 40 सरकारी संपत्तियों को लेकर उठाए सवाल कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश के 12 जिलों में लगभग 40 महत्वपूर्ण सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही है। इनमें ऋषिकेश की 633 एकड़ IDPL भूमि, मसूरी की जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट, अंग्रेजों के समय के 25 निरीक्षण बंगले, विकासनगर-डाकपत्थर में यमुना जलविद्युत परियोजना की 180 एकड़ जमीन और हरिद्वार का अलकनंदा होटल शामिल हैं। कांग्रेस ने इन संपत्तियों के आवंटन को लेकर सरकार से सार्वजनिक रूप से पूरी जानकारी देने और प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। BJP का पलटवार, बताया विकास के लिए जरूरी दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज किया है। सरकार और भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकारी जमीनों को बेचने की कोई नीति नहीं है। सरकारी स्वामित्व बरकरार रखते हुए अनुपयोगी संपत्तियों का पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। भाजपा का तर्क है कि इस तरह के निवेश से उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और पलायन रोकने में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि भूमि आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत की जा रही है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर राजनीतिक विरोध के लिए जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में करीब 13 हजार एकड़ सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। राज्यपाल से मुलाकात की तैयारी में कांग्रेस कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीनों के आवंटन का मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी इस मामले को लेकर प्रदेशभर में आंदोलन जारी रखने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंप सकती है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में CBI या न्यायिक जांच कराने की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाने की भी बात कही गई है। फिलहाल जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट से शुरू हुआ यह विवाद उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़े मुद्दे के रूप में उभर रहा है। आने वाले दिनों में सरकारी संपत्तियों के आवंटन और उनके इस्तेमाल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना है। HIMALAYAVANI | उत्तराखंड Post Views: 3 Post navigation देहरादून में 93 दिन से लापता छात्र का कंकाल मिला, दोस्तों पर हत्या का शक