उत्तराखंड में भारी बारिश से बिगड़े हालात, 107 सड़कें बंद; गंगा-अलकनंदा उफान पर, चमोली टनल हादसे में 9 मौतें
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देहरादून। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखा रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हो गया है। भारी बारिश से जहां पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कें बंद होने का सिलसिला जारी है, वहीं नदियों का जलस्तर बढ़ने से मैदानी और नदी किनारे बसे इलाकों में भी खतरा बढ़ गया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की नवीनतम रिपोर्ट ने हालात की गंभीरता को सामने रखा है।

107 सड़कें यातायात के लिए बंद

भारी बारिश और भूस्खलन के चलते प्रदेश में कुल 107 सड़कें यातायात के लिए बाधित हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या ग्रामीण सड़कों की है। रिपोर्ट के अनुसार PMGSY की 87 ग्रामीण सड़कें बंद हैं। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग (PWD) की 17 सड़कें, 2 राज्य मार्ग और 1 राष्ट्रीय राजमार्ग भी यातायात के लिए बंद बताया गया है।

सड़कों के बंद होने से पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कटने की स्थिति बनी हुई है। सड़कें बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ जरूरी सामान की आपूर्ति और यात्रियों की आवाजाही पर भी असर पड़ रहा है।

गंगा और अलकनंदा का जलस्तर बढ़ा

लगातार बारिश का सीधा असर प्रदेश की प्रमुख नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाट जलमग्न हो गए हैं। नदी किनारे जाने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

वहीं श्रीनगर में अलकनंदा नदी का पानी घाट और निचले क्षेत्रों तक पहुंच गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए आसपास के इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।

प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी-नालों के आसपास न जाएं और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं।

चमोली टनल हादसे ने बढ़ाई चिंता

बारिश के बीच चमोली में हुआ टनल हादसा भी राहत और बचाव एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। हादसे के बाद लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है।

जिला प्रशासन के साथ SDRF और अन्य राहत-बचाव टीमें मौके पर जुटी हैं। मलबे और कठिन परिस्थितियों के बीच लापता श्रमिकों की तलाश की जा रही है। खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के कारण रेस्क्यू टीमों को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

पहाड़ से मैदान तक बढ़ी चुनौती

उत्तराखंड में भारी बारिश का असर केवल सड़क और यातायात तक सीमित नहीं है। कई क्षेत्रों में नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर बढ़ने से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, जबकि निचले इलाकों में नदी का पानी बढ़ने से बाढ़ जैसी स्थिति की आशंका बनी हुई है।

बारिश के कारण पहले से संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में जोखिम और बढ़ गया है। प्रशासन की टीमें सड़क खोलने, प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच बनाने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए सक्रिय हैं।

यात्रियों के लिए जरूरी सलाह

मौसम खराब होने और कई मार्गों के बाधित होने के बीच पहाड़ों की ओर यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रशासन की ओर से यात्रियों से अपील की जा रही है कि यात्रा से पहले सड़क और मौसम की स्थिति की जानकारी जरूर लें।

भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी किनारे और तेज बहाव वाले गदेरे-नालों के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है। बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर वाहन चलाते समय भी अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।

सवाल यह है कि हालात और कितने बिगड़ेंगे?

लगातार बारिश, बंद सड़कों, बढ़ते नदी जलस्तर और चमोली टनल हादसे ने एक साथ कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे में प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बंद मार्गों को खोलना, प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना और संवेदनशील क्षेत्रों में किसी बड़े हादसे को रोकना है।

फिलहाल पूरा प्रशासनिक तंत्र अलर्ट मोड पर है और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।