Spread the loveदेहरादून। उत्तराखंड में NEET UG 2026 की राज्य काउंसलिंग के दौरान MBBS दाखिलों में इस्तेमाल किए गए प्रमाणपत्रों को लेकर उठे सवालों की जांच अब आगे बढ़ गई है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के प्रमाणपत्रों में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद देहरादून पुलिस की SIT ने मामले से जुड़े दस्तावेज जुटाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को SIT की टीमें मेडिकल कॉलेज श्रीनगर और हल्द्वानी पहुंचीं। यहां से संबंधित छात्राओं द्वारा MBBS दाखिले के समय जमा किए गए दस्तावेज अपने कब्जे में लिए गए। पुलिस अब इन दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि आवेदन से लेकर प्रमाणपत्र जारी होने और मेडिकल कॉलेज में दाखिले तक पूरी प्रक्रिया में कहां गड़बड़ी हुई। एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम से जुड़े प्रमाणपत्रों पर सवाल मामले की शुरुआती जांच में चार छात्राओं के दस्तावेज सामने आए, जिनमें एक ही स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर वर्मा से जुड़े प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। जांच एजेंसियां अब यह सत्यापित कर रही हैं कि इन प्रमाणपत्रों के लिए जरूरी दस्तावेज कहां से आए और उनका सरकारी स्तर पर सत्यापन किस तरह हुआ। इस मामले में देहरादून के क्लेमेनटाउन और रायपुर थाने में दो मुकदमे दर्ज हैं। पांच महिलाओं के नाम जांच के दायरे में हैं। पुलिस के अनुसार मामले में इस्तेमाल किए गए प्रमाणपत्र तैयार कराने की प्रक्रिया और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है। चार MBBS दाखिले निरस्त जांच के दौरान चार छात्राओं के दाखिलों पर भी कार्रवाई हुई है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी पाए जाने के बाद चार MBBS दाखिले निरस्त किए गए हैं। इसके साथ ही NEET UG 2026 की राज्य काउंसलिंग के अन्य दाखिलों के प्रमाणपत्रों को लेकर भी सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई है। HNB उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि स्थायी निवास और आरक्षण से जुड़े प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जाएगा और दस्तावेज गलत पाए जाने पर प्रवेश रद्द किया जा सकता है। करीब 350 अभ्यर्थियों के दस्तावेज जांच के दायरे में इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल को करीब 350 संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची सौंपकर उनके दस्तावेजों की जांच की मांग की है। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या करीब 370 बताई गई है। हालांकि, सूची में नाम होना अपने आप में फर्जी प्रमाणपत्र का प्रमाण नहीं है। संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की आधिकारिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने मामलों में वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ है। चार CSC केंद्रों पर भी कार्रवाई देहरादून प्रशासन ने चार Common Service Centres यानी CSC केंद्रों को सील कर कुछ कंप्यूटर और लैपटॉप भी जब्त किए हैं। इन केंद्रों की भूमिका और वहां से किए गए ऑनलाइन आवेदनों की प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि प्रमाणपत्रों में कथित गड़बड़ी केवल कुछ मामलों तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। हालांकि SIT ने जांच पूरी होने से पहले किसी संगठित गिरोह को लेकर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी बताया है। अब अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में SIT प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया को देख रही है। इसमें आवेदन से लेकर स्थानीय स्तर पर सत्यापन, राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट और सक्षम अधिकारी की मंजूरी तक के रिकॉर्ड की जांच शामिल है। अब सबसे अहम सवाल यही है कि जिन दस्तावेजों के आधार पर MBBS जैसी महत्वपूर्ण मेडिकल सीट पर प्रवेश मिला, उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ और यदि किसी प्रमाणपत्र में गड़बड़ी पाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। फिलहाल जांच जारी है। SIT की रिपोर्ट और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी। Post Views: 12 Post navigation सरकारी नौकरियों में SC-ST-OBC आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सरकार से मांगा जवाब 370 संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची पहुंची सुबोध उनियाल तक, जांच के दिए निर्देश