ब्रेकिंग: अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीनों दोषियों को हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिकाएं खारिज
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नैनीताल। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में बुधवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को बड़ा झटका दिया। हाईकोर्ट ने तीनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दो दिन तक चली सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।

इस फैसले के बाद तीनों दोषियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। तीनों ने कोटद्वार की निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी और अपील लंबित रहने तक जमानत पर रिहाई की मांग की थी। हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया, जबकि उनकी मुख्य अपील पर आगे सुनवाई जारी रहेगी।

दो दिन चली सुनवाई, दोनों पक्षों ने रखीं दलीलें

जमानत याचिकाओं पर हाईकोर्ट में लगातार दो दिनों तक सुनवाई हुई। बचाव पक्ष की ओर से दोषियों को राहत देने के लिए कई दलीलें पेश की गईं, जबकि अभियोजन पक्ष और पीड़ित परिवार की ओर से जमानत का कड़ा विरोध किया गया।

अभियोजन पक्ष ने निचली अदालत के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें तीनों को अंकिता की हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी माना गया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

18 सितंबर 2022 को लापता हुई थी अंकिता

अंकिता भंडारी वर्ष 2022 में ऋषिकेश के पास स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थीं। उनकी तलाश शुरू होने के बाद मामला लगातार गंभीर होता गया।

करीब छह दिन बाद 24 सितंबर 2022 को अंकिता का शव चीला बैराज से बरामद किया गया। इसके बाद मामले की जांच में वनंत्रा रिजॉर्ट के तत्कालीन मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया।

30 मई 2025 को निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद

इस मामले में कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 30 मई 2025 को तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने हत्या और साक्ष्य मिटाने समेत संबंधित धाराओं में दोष सिद्ध माना था। इसके बाद दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

VIP एंगल को लेकर आज भी सवाल

अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद सामने आए कथित ‘VIP एंगल’ ने पूरे मामले को राजनीतिक और सामाजिक रूप से बेहद संवेदनशील बना दिया था। यह आरोप लगाया गया था कि अंकिता पर कथित VIP मेहमानों को ‘विशेष सेवाएं’ देने का दबाव बनाया गया था।

हालांकि, किसी व्यक्ति को इस मामले का VIP बताकर दोषी ठहराया जाना अलग बात है और केवल आरोप या राजनीतिक दावे अलग। इसलिए इस मुद्दे पर किसी व्यक्ति का नाम तथ्यात्मक रूप से तभी जोड़ा जाना चाहिए, जब आधिकारिक जांच या अदालत के रिकॉर्ड में उसकी पुष्टि हो।

इस मामले में CBI जांच की मांग भी उठी थी। उत्तराखंड सरकार के अनुसार, अंकिता के माता-पिता की मांग पर मामले की CBI जांच के आदेश दिए गए थे।

सरकार ने कहा—अंकिता को न्याय दिलाने के लिए मजबूत पैरवी

तीनों दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि सरकार ने मामले में मजबूत कानूनी पैरवी की है और अंकिता को न्याय दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सरकार ने यह भी कहा कि दोषियों को कानून के तहत कठोर सजा सुनिश्चित कराने के लिए पैरवी जारी रहेगी।

अब आगे क्या?

हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने का अर्थ यह है कि तीनों दोषियों को फिलहाल जेल से रिहाई नहीं मिलेगी। हालांकि उनकी मुख्य अपील अभी लंबित है। यानी हाईकोर्ट में निचली अदालत की उम्रकैद की सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर आगे सुनवाई होनी बाकी है।

अंकिता के परिवार के लिए फैसले का क्या मायने?

चार साल से अधिक समय से चले आ रहे इस मामले में हाईकोर्ट का ताजा फैसला अंकिता के परिवार और न्याय की मांग कर रहे लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। निचली अदालत से उम्रकैद की सजा के बाद अब जमानत की मांग भी खारिज होने से तीनों दोषियों को तत्काल राहत नहीं मिल पाई है।

हालांकि अंतिम कानूनी स्थिति हाईकोर्ट में लंबित मुख्य अपील के फैसले पर निर्भर करेगी।