Spread the loveदेहरादून / चंपावत। उत्तराखंड में मॉनसून एक बार फिर फुल मूड में है। पिछले 24 घंटे में राज्य में औसतन 52.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। लगातार हो रही बारिश से पहाड़ से लेकर मैदान तक जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कई जगहों पर नदी-नाले उफान पर हैं और दो नेशनल हाईवे समेत 145 से ज्यादा मार्ग बंद हो गए हैं।मौसम विभाग का अलर्ट : कहां कितना खतरा?मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने आज के लिए राज्य में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।ऑरेंज अलर्ट (भारी से बहुत भारी बारिश):मौसम विभाग के अनुसार आज बागेश्वर, चमोली व पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश और गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने की आशंका है, जिसे लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।दूसरे बुलेटिन में देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन ताजा अपडेट में देहरादून, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट में बदला गया है।येलो अलर्ट (भारी बारिश और तेज बौछारें):उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और चम्पावत जिले में तेज बारिश का येलो अलर्ट है। इन जिलों के संवेदनशील इलाकों में अचानक तेज बारिश से नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।विभाग ने कहा है कि अगले दो दिन तक मौसम का मिजाज इसी प्रकार का बना रह सकता है।IMD ने भी उत्तराखंड के लिए अगले चार दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है और आपदा प्रबंधन विभाग ने अल्मोड़ा, देहरादून, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, पौड़ी, नैनीताल, टिहरी, रुद्रप्रयाग व पिथौरागढ़ के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर बाढ़ के खतरे का पूर्वानुमान जताया है।नेपाल में जलप्रलय – उत्तराखंड की सीमा पर असरनेपाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इसका सीधा असर उत्तराखंड पर पड़ रहा है।नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ से मची तबाही का असर अब सीमावर्ती चम्पावत में भी दिखाई देने लगा है। नेपाल में आपदा के बीच शारदा नदी के जलस्तर को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है।प्रशासन ने टनकपुर में SDRF को हाई अलर्ट पर रखते हुए शारदा बैराज, घाटों और निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।उत्तराखंड के तीन जिले पिथौरागढ़, चंपावत और उधम सिंह नगर नेपाल की सीमा से लगते हैं। फिलहाल चंपावत में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है और राज्य आपदा मोचन बल को स्टैंडबाय मोड पर रखा गया है।भारत-नेपाल सीमा पर SSB की बटालियनों को भी अलर्ट कर दिया गया है। घाघरा-करनाली और महाकाली नदी तंत्र से जुड़े संवेदनशील इलाकों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।टनकपुर, बनबसा और खटीमा के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी किनारे न जाने की एडवाइजरी जारी की गई है। कई पर्यटकों ने सुरक्षा कारणों से नेपाल यात्रा रद्द करनी शुरू कर दी है।प्रशासन की तैयारीNDRF और SDRF की टीमें संवेदनशील जिलों में तैनात।शारदा बैराज पर 24 घंटे निगरानी।जिला कंट्रोल रूम को एक्टिव किया गया।चारधाम यात्रा मार्गों पर भूस्खलन को लेकर विशेष सतर्कता।पुरानी आपदाओं की याद ताजालगातार बारिश और नेपाल में बाढ़ की खबरों ने लोगों को 2013 की केदारनाथ आपदा और 2021-2023 की बाढ़ की घटनाओं की याद दिला दी है। लोगों में दहशत का माहौल है, खासकर नदी किनारे बसे गांवों में।जनता से अपील: मौसम विभाग और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अनावश्यक पहाड़ी यात्रा न करें, नदी-नालों से दूर रहें, और किसी भी आपात स्थिति में 112 या SDRF हेल्पलाइन पर संपर्क करें। Post Views: 4 Post navigationमौसम अलर्ट और बंद सड़कें: उत्तराखंड में 4 जिलों में येलो अलर्ट, तवाघाट-लिपुलेख हाईवे बंद, 78 से ज्यादा मार्ग अवरुद्ध रुद्रपुर जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी पर CM को ज्ञापन देने जा रहे पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल हिरासत में, बाद में रिहा