Spread the loveदेहरादून। उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता के बीच लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। पहाड़ी जिलों में जगह-जगह भूस्खलन, मलबा आने और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। वहीं तेज बारिश के कारण नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कई इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।124 से ज्यादा सड़कें और संपर्क मार्ग बंदलगातार बारिश और भूस्खलन के कारण राज्य में 124 से अधिक सड़कें और संपर्क मार्ग बंद होने की जानकारी सामने आई है। कई स्थानों पर पहाड़ी से मलबा और बोल्डर सड़क पर गिरने के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है।सड़कें बंद होने से ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगह आवश्यक सेवाओं और रोजमर्रा की आवाजाही पर भी इसका असर पड़ा है। संबंधित विभागों की टीमें जेसीबी और अन्य मशीनरी की मदद से मलबा हटाकर मार्ग खोलने में जुटी हैं। हालांकि लगातार बारिश और नए भूस्खलन के खतरे के कारण सड़क बहाली का काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।स्वर्णा नदी में बढ़ा जलस्तर, थान गांव में फंसे 6 छात्रदेहरादून के थान गांव क्षेत्र में भारी बारिश के बाद स्वर्णा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इसी दौरान यूनिवर्सिटी के छह छात्र वहां फंस गए। पानी का बहाव तेज होने के कारण छात्रों के लिए वापस लौटना मुश्किल हो गया।छात्रों के फंसे होने की सूचना मिलने के बाद SDRF की टीम ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। टीम ने कठिन परिस्थितियों के बीच मौके पर पहुंचकर सभी छह छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।रेस्क्यू के दौरान नदी का तेज बहाव और लगातार बारिश बड़ी चुनौती बनी रही। SDRF की तत्परता के चलते सभी छात्रों को सुरक्षित निकाल लिया गया और एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया गया।खारा श्रोत में भी चला रेस्क्यू ऑपरेशनदेहरादून के खारा श्रोत क्षेत्र में भी तेज बारिश के कारण बरसाती नाला उफान पर आ गया। पानी के तेज बहाव के बीच कई लोगों के फंसे होने की सूचना पर राहत-बचाव दल सक्रिय हुआ।SDRF और स्थानीय टीमों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। लगातार बारिश के दौरान बरसाती नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने के कारण प्रशासन लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील कर रहा है।अलग-अलग हादसों में 4 लोगों की मौतभारी बारिश के बीच राज्य में नदी-नालों के उफान और अन्य बारिश से जुड़ी घटनाओं में चार लोगों की मौत की खबर सामने आई है। कई अन्य लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।इन घटनाओं ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि मानसून के दौरान नदी किनारे, बरसाती नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।लोगों से नदी-नालों से दूर रहने की अपीलप्रशासन और SDRF ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान नदी, नाले और बरसाती गदेरे पार करने या उनके किनारे जाने का जोखिम न उठाएं। पहाड़ों में कई बार ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश का असर कुछ समय बाद निचले इलाकों में अचानक दिखाई देता है और पानी का बहाव बेहद तेज हो सकता है।पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भी मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जा रही है। विशेष रूप से भूस्खलन संभावित मार्गों पर यात्रा करने से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है।सड़क बहाली बनी बड़ी चुनौतीराज्य में बड़ी संख्या में सड़कें बंद होने के बाद संबंधित विभागों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यातायात को जल्द से जल्द बहाल करने की है। एक तरफ मशीनरी मलबा हटाने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ लगातार बारिश के कारण नए भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।ऐसे में प्रशासन के सामने राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ सड़क संपर्क बहाल करने और संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दोहरी चुनौती है।करारा सवाल: हर मानसून में क्यों दोहराती हैं ये तस्वीरें?उत्तराखंड में हर साल मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़क बंद होने, नदी-नालों के उफान और रेस्क्यू ऑपरेशन की घटनाएं सामने आती हैं। तत्काल राहत और बचाव जरूरी है, लेकिन इसके साथ भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की स्थायी सुरक्षा, सड़कों की मजबूती, प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था और समय रहते चेतावनी तंत्र पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है।फिलहाल प्रशासन और SDRF की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय हैं। लोगों से अपील है कि मौसम खराब होने पर प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करें और नदी-नालों तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। Post Views: 6 Post navigationस्कूलों की छुट्टी को लेकर असमंजस: पौड़ी में स्कूल बंद, देहरादून में छुट्टी का फर्जी आदेश वायरल ब्रेकिंग: उत्तराखंड भाजपा ने बदले 19 सांगठनिक जिलों के प्रभारी, अब इनके हाथ संगठन की कमान