धामी कैबिनेट का बड़ा तोहफा: 22 हजार उपनल कर्मियों को समान वेतन, अग्निवीरों के लिए बनेगा अलग रोजगार सेल
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देहरादून। उत्तराखंड में उपनल (UPNL) के माध्यम से 2004 से करीब 22,000 कर्मचारी विभिन्न विभागों – शिक्षा, स्वास्थ्य, PWD, सचिवालय में संविदा पर काम कर रहे हैं। इनका मुख्य दर्द 3 था – 1. नियमित के मुकाबले आधा वेतन, 2. हर साल 10-15 दिन का अनिवार्य सर्विस ब्रेक जिससे सर्विस टूट जाती थी और 3. कोई DA, ग्रेड-पे नहीं।

वहीं अग्निवीर योजना 2022 में आने के बाद उत्तराखंड के युवाओं में सबसे बड़ा सवाल था – 4 साल बाद क्या होगा? राज्य सैनिक बाहुल्य है, हर साल 800-1000 युवा अग्निवीर बनकर लौटेंगे।

इसी दो दर्द को 25 अगस्त 2026 की कैबिनेट ने टारगेट किया।


1. उपनल कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक राहत – सिर्फ वेतन नहीं, सम्मान भी

कैबिनेट ने क्या मंजूर किया?
समान कार्य के लिए समान वेतन को 3 चरणों में लागू करना, न्यूनतम वेतन + परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) देना, स्वीकृत पद से अधिक कार्यरत कर्मियों के लिए अधिसंख्य पदों का सृजन और शासन स्तर पर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन।

इसका विस्तारित लाभ:

A. आर्थिक सुरक्षा:
पहले एक चतुर्थ श्रेणी उपनल कर्मी को 12,000-15,000 मिलता था, जबकि उसी काम के नियमित को 25,000-30,000। अब लेवल-1 के हिसाब से वेतनमान मिलने से सीधे 40-60% की बढ़ोतरी तय है। साथ ही DA जुड़ने से महंगाई के हिसाब से हर 6 महीने में वेतन बढ़ेगा।

B. मानसिक तनाव से मुक्ति:
सर्विस ब्रेक की शर्त सबसे बड़ी प्रताड़ना थी। ब्रेक के दौरान न वेतन, न स्वास्थ्य बीमा। कई बार ब्रेक के बाद दोबारा जॉइनिंग में 2-3 महीने लग जाते थे। कैबिनेट ने अधिसंख्य पद सृजित करने का फैसला लेकर इस ब्रेक सिस्टम को अप्रत्यक्ष रूप से खत्म करने का रास्ता खोल दिया है। अब सेवा निरंतर मानी जाएगी।

C. विभागों को फायदा:
अनुभवी कंप्यूटर ऑपरेटर, ड्राइवर, चपरासी बार-बार बदलने से फाइलों का काम रुकता था। सेवा निरंतरता से विभागों की कार्यक्षमता बढ़ेगी।

चुनौती क्या रहेगी?
तीसरे चरण के कर्मियों (2018-2024 वाले) को 1 अप्रैल 2027 तक इंतजार करना होगा। साथ ही समिति को यह तय करना होगा कि समान कार्य की परिभाषा क्या होगी।

2. अग्निवीर एंप्लॉयमेंट सेल – चार साल बाद बेरोजगारी नहीं, सम्मानजनक पुनर्वास

कैबिनेट ने क्या मंजूर किया?
राज्य स्तर पर एक समर्पित प्रकोष्ठ, जिसके लिए 6 संविदा पद – 1 उप निदेशक (रिटायर्ड कर्नल स्तर), 2 सहायक निदेशक, 2 कनिष्ठ सहायक, 1 DEO को मंजूरी।

इसका विस्तारित लाभ और कार्य:

A. पुनर्वास की गारंटी:
यह सेल सभी लौटे अग्निवीरों का डेटाबेस बनाएगा। जैसे ही कोई युवा 4 साल बाद लौटेगा, उसका ऑटोमेटिक पंजीकरण होगा। उसे भटकना नहीं पड़ेगा।

B. वरीयता और अवसर – कहाँ-कहाँ नौकरी?

  1. पुलिस भर्ती: उत्तराखंड पुलिस में पहले ही अग्निवीरों के लिए 10% क्षैतिज आरक्षण का प्रस्ताव है, ये सेल उसका नोडल बनेगा।
  2. वन, आपदा, परिवहन: फॉरेस्ट गार्ड, SDRF, परिवहन निगम में सीधी प्राथमिकता।
  3. निजी क्षेत्र: देहरादून, हरिद्वार सिडकुल की कंपनियों के साथ सेल MoU करेगा, जहाँ अनुशासित मैनपावर की जरूरत है।

C. स्वरोजगार को बढ़ावा:
जो युवा अपना जिम, सिक्योरिटी एजेंसी, टूरिज्म का काम शुरू करना चाहते हैं, उन्हें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में 25% सब्सिडी, कौशल विकास में ट्रेनिंग और बैंक लोन में इस सेल के माध्यम से हैंडहोल्डिंग मिलेगी।

D. मजबूत ढांचा क्यों जरूरी?
पहले सैनिक कल्याण विभाग में अग्निवीरों के लिए कोई अलग डेस्क नहीं था। 6 पदों की मंजूरी से साफ है कि सरकार इसे एक्टिव रखना चाहती है, न कि केवल फाइल में।

कुल निष्कर्ष:
ये दोनों फैसले रोजगार के नए मानक स्थापित करेंगे। उपनल से सरकार को अनुभवी और स्थिर कार्यबल मिलेगा, और अग्निवीर सेल से युवाओं में सेना के प्रति भरोसा बढ़ेगा कि 4 साल की सेवा के बाद राज्य सरकार कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।